Site icon Jyoti Marg | ज्योति मार्ग

ईश्वर इच्छा क्या होती है? क्यों होती है? उसे कैसे प्राप्त करें?

#33

ॐ

 

ईश्वर के अंतर्गत यह ब्रह्माण्ड है, यह ईश्वर के सहज संकल्प से उत्पन्न हुआ है। ईश्वर ज्योति स्वरूप, प्रकाशमय शक्ति है। प्रत्येक उत्पत्ति में वह शक्ति विराजमान है।

 

जब भी ईश्वर नई रचना का संकल्प किसी मनुष्य में इच्छा के रूप में साक्षी बनकर देखते हैं, तो उस कल्याणकारी कार्य की सफलता के लिए अपनी ऊर्जा दान में देते हैं। वह इच्छा शक्ति कहलाती है। वह शक्ति प्राण है। 

 

जब ईश्वर इच्छा हमारी शुभ इच्छा में सम्मिलित हो जाती है, उस प्राणी में व जगत में विकास होता है जो सर्व के लिए प्रेरणात्मक व हितकारी सिद्ध होता है। ईश्वर इच्छा सदैव सर्व के लिए शुभ होती है। समाज बदलता है। पुनः धर्म की स्थापना होती है, नए विचारों का प्रवाह होता है। 

 

मनुष्य के संकल्प, विचार उसकी चेतना के प्रतीक हैं, मापदण्ड हैं। जितनी चेतना जागी होगी, उतनी कल्याणकारी, निष्कामी उससे जीवन यात्रा होगी। जितनी चेतना अन्तःकरण में दैदिप्यमान होगी, उतना प्रकाश जन जन में फैलेगा। 

 

उस ईश्वर इच्छा को, प्रज्जवलित ज्योति को, मन के अंतर्गत प्रवाहित करने के लक्ष्य हेतु हमें अपने चित्त से शुभ कर्म, ध्यान, तपस्या, त्याग व मन की मौन करनी होगी। केवल तपस्या की अग्नि द्वारा चेतना की लौ सदा के लिए प्रज्ज्वलित रहती है। 

 

ईश्वर से प्रार्थना करो कि तुम्हें उनका सान्निध्य प्राप्त हो, तुम पर वह कृपा करने के लिए विवश हो जाएँ। उनकी इच्छा तुम स्वीकारो और पूर्ण करो। प्रत्येक दिन ध्यान करो, ईश्वर के शान्त स्वरूप का ध्यान करो। तुम्हारी चेतना पर उनकी कृपा की वर्षा की बूँदें गिर जाएँगी, तुम्हारी चेतना, ईश्वर की चेतना एक हो जाएगी। 

Exit mobile version