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अपना जीवन सुखदाई व शान्तिप्रद कैसे बनाएँ ?

#35

 

जीवन को पूर्ण रूप से सुखदाई व शान्तिप्रद बनाने के लिए उसे सबसे पहले अनुशासन में लाना होता है ।  (१)

अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित बनाकर, समय को सदुपयोगी बनाना होता है, शान्ति का प्रवाह व्यवस्था में होता है ।  (२)

समय सबसे बलवान है, प्रारब्ध व संचित कर्म का आक्रोश कभी कभी असहनीय हो जाता है, ऐसे समय में ध्यान व धैर्य काम आता है ।   (३)

मन में संतोष, क्षमा व उदारता का दीप जलाओ, मन प्रज्ज्वलित हो जाता है; क्लेश, चिन्ता व ईर्ष्या सदा संतोष, धैर्य व उदारता से नाश होते हैं ।  (४)

कभी भी भूल कर भी कटाक्ष व कटु शब्द मत बोलना; उनका प्रायश्चित बहुत कठिन होता है, दूसरों को क्षमा कर देना ।  (५)

तुम्हारे धैर्य, क्षमा, सन्तोष का बहुत बार उपहास होगा, तुम अपने चरित्र व संस्कार पर अडिग रहना, एक दिन उनका सौभाग्य उनसे रूठ जाएगा ।  (६)

कठिन से कठिन परिस्थिति में ईश्वर में विश्वास मत छोड़ना, एक दिन तुम्हारी मन की शान्ति तुम्हारी सबसे बड़ी शक्ति सिद्ध होगी।   (७)

प्रतिदिन मन को अति शुभ विचारों व कर्मों से प्रकाशित करते रहो, तुम्हारे मन में ईश्वर का निवास सदा बना रहेगा; तुम आत्मा में निवास करो।  (८)

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