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कल किसने देखा है?

#50

आने वाला कल एक रहस्य की चादर से ढ़का है, किसे पता उसमें क्या-क्या छिपा है? 

सुनहरे अक्षरों से भविष्य लिखा है या ढ़ेर सारी समस्याओं का हमको सामना करना पड़ेगा? 

जो बीज अतीत में हमने इधर उधर डाले हैं, वे ही तो साकार होकर सामने आएँगे। 

जो कभी न सोचा था वह भी घटित हो सकता है या फिर मनचाही बातें पूरी होंगी? 

यह तो केवल परमात्मा जाने आगे क्या होने वाला है; अपना कर्म करते जाओ, सोचो मत। 

मन में भविष्य के लिए उत्थान व प्रगति का सोचो और प्रभु से माँगो सबका केवल कल्याण। 

मन में अपने विचारों को सदा प्रेम व शान्ति से ओत-प्रोत करो; अपनी जिम्मेदारी लगन से करो।

जो जैसा करता है, वो वैसा ही भविष्य अपना रचता है; कल किसने देखा है, कल कैसा होगा? 

जब-जब हम अपने सुनहरे सपनों को साकार करने की चेष्टा करते हैं, तब-तब मन में नए विचार आते हैं। 

अपने विचारों की धारा को ईश्वर की मर्ज़ी से मिला लो, किसे पता हमसे कुछ असम्भव हो जाए?

कर्म क्या है? कर्म फल क्या होता है? ऐसा क्यों होता है? वैसा क्यों होता है ? यह एक जटिल समस्या है। 

ईश्वर के रहस्य व भविष्य को पढ़ना और जानना कोई बिड़ला ही कर पाता है, जो जानता है वो मौन है। 

हमें अपनी कठिनाइयों को पूरी क्षमता से सामना करना होता है, तभी जाकर भविष्य अच्छा निर्माण होता है। 

ईश्वर की लीला अपरम्पार है, उसे कौन जानता या स्वीकार करता है? परन्तु जान लो होगा वही, जो होना है। 

 

जब भी किसी स्थान पर, सभ्यता या मनुष्य में अत्यधिक प्रगति व समृद्धि अकस्मात होती है, वहाँ का काल-चक्र बदलता है। 

सौम्यता, शालीनता व सभ्यता प्रगति व समृद्धि के साथ-साथ यदि नहीं अपनाई गईं, तो विनाश अटल है। 

समय सबको अपनी शक्ति अवश्य दिखाता है, जो कभी किसी ने नहीं सोचा, वह वहाँ उस स्थान पर होता है। 

एक समय के बाद उस उल्टे पहिये को न कोई बदल सकता है न उसकी चाल सही कर सकेगा, समय शक्ति है।

 

अपनी प्रभुता, शक्ति, धन, समय, बल व बुद्धि का जो भी ईश्वर से पाकर दुरुपयोग करता है, समय उससे छल करता है। 

एक बार बिगड़ी समय की सुगम चक्रधारा स्वार्थी मनुष्यों को ईश्वर का संकेत अवश्य देती हैं, परन्तु विनम्रता न दिखाई तो विनाश अवश्य है। 

जो-जो मनुष्य केवल अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए प्रतिदिन जीते हैं, समय और भाग्य दोनों उन्हें अपनी पीठ दिखाते हैं। 

यदि चाहते हो तुम कि तुम्हारा भविष्य प्रतिदिन सुन्दर व गौरवशाली होता जाए, तो स्मरण रहे स्वार्थ व  लोभ को इसी क्षण सदा के लिए त्याग दो। 

जो किसे भी नहीं ज्ञात, वो सब परमात्मा को बोध है, कब तक अपने गुप्त व रोगी विचारों को संसार से  छिपाते यहाँ-वहाँ भटकोगे? 

तुम्हारा समय, तुम्हारा भविष्य व आज का प्रारब्ध जो कुछ भी रचा या उगने वाला है, वो सब स्वयं का ही तो निर्माण किया है।

सत्य अटल है, समय अटल है, भाग्य अटल है, भविष्य तुम्हारा अटल है; ईश्वर से मिला न्याय भी संसार में अटल है। 

ईश्वर परम सत्य है, ईश्वर का न्याय अचूक है, समय पर ईश्वर से मिला न्याय को भी मनुष्य पलटने में असफल है। 

कभी भी अपना धीरज मत त्यागो, मन में शान्ति स्थिर रखो, ईश्वर को तुम्हारे सत्य को प्रकट करने का एक अवसर दो। 

कभी न सोचा था तुमने वो तुम्हारा भविष्य होगा यदि तुम सदैव अपने मन को हर परिस्थिति में शान्ति व मौन में रखोगे। 

सदा अपने मन को ईश्वर की भक्ति व मानव सेवा में व्यस्त रखो, तुम्हारा जन्म और कर्म दोनों पूर्ण रूप से सफल व यशस्वी होंगे। 

भविष्य उनका स्वर्णिम होता है जो नि:स्वार्थ जीवन जीते हैं, समय-समय पर जैसी परिस्थिति आती है, अपने को उस मे ढ़ालते हैं। 

 

कल उसने देखा है जिसका ध्यान व साधना दोनों निरन्तर है, लगातार मन को साधो, तुम्हें अपना भविष्य साफ़-साफ़ दिखेगा। 

यदि हमने भूमि में कर्म के बीज अति कोमल व लाभकारी डाले हैं, उनसे जो पौधे निकलेंगे वे सदा  हितकारी व लाभकारी होंगे। 

समय का सम्मान करो, समय से डरो यदि वह तुमसे विपरीत हुआ तो याद रहे ईश्वर भी तुम्हें कभी साथ न देंगे। 

हर घटना से सीखो, जैसा समय है वैसा उसमें खुश रहो, जितना मिला है उसमें सन्तुष्ट रहो, बुरे कर्मों से हमेशा के लिए नाता तोड़ दो। 

बुराइयों को त्यागकर मन में नए सुन्दर विचारों को निर्मित करते जाओ। भविष्य तुम्हारा उज्जवल अवश्य होगा, मन में पल-पल ईश्वर का स्मरण करना मत भूलो।

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