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मौन पवित्र मन में होता है, मन में मौन रखो।

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मौन 

  1.  मौन का अर्थ होता है, विचार रहित एवं संकल्प रहित।
  2.  इस अवस्था में ईश्वर मन में शान्त रूप में होते हैं।
  3.  मौन जब अकस्मात आ जाए, जान लो तुम्हारा मन साधना से अति पवित्र हो चुका है।
  4.  मन का मौन विचारों का अंत है परन्तु ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण है।
  5.  मन का थोड़ा भी रखा गया मौन, वायुमंडल में लोगों के तैरते अनिष्ट संकल्पों को जला देता है।
  6.  मौन रखने के बाद यदि ध्यान लगाया जाए तो ब्रह्मांड में छुपे अनेकों रहस्य अकस्मात प्रकट हो जाते हैं।
  7.  मन का मौन अनेक जन्मों की स्मृतियों को खोल देता है जिससे मन अपनी सोई हुई शक्तियों को जगा सकता है।
  8.  मन में मौन रखना अनिवार्य है। ध्यान व शान्ति का अभ्यास करते रहो। ऐसा करना के बाद मौन सहज हो जाता है। मौन ईश्वर को जानने का प्रवेश द्वार है। यह साधक के जीवन का अभिन्न अंग है। मौन ईश्वर की शक्तियों को प्राप्त करने का सबसे सरल साधन है।

 

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