Site icon Jyoti Marg | ज्योति मार्ग

इच्छा शक्ति या ईश्वर-इच्छा बड़ी शक्ति?

#55

1 of 7

परमात्मा –

“तुमने आज से पूर्ण दस वर्ष पहले इसी तारीख़ व समय पर मुझसे निष्पाप मन से बालक की भाँति पूछा था, “हे भगवन्, मुझे कृपा करके बताएँ विश्व में आपकी बनाई हुई सबसे बड़ी शक्ति कौन सी है? मुझे परमाणु शक्ति मत कहना क्योंकि वे तो मनुष्य संसार की अनेक वस्तुओं से नव निर्माण कर ही लेता है। विनाशकारी वस्तुएँ आप नहीं बना सकते। यह कार्य मूढ़ मनुष्य ही कर सकता है।”

मैंने तुम्हें उत्तर दिया था, “इच्छा शक्ति।

मनुष्य में विद्यमान इच्छा शक्ति विश्व में सबसे बड़ी शक्ति है। उसे प्राप्त करके मनुष्य कठिन से कठिन व कल्पना के परे जो कर्म हैं, वे कर लेता है। परन्तु याद रहे मैंने ही मनुष्य के लिए इच्छा शक्ति का निर्माण किया है।

दस वर्षों में मैंने तुम्हें इच्छा शक्ति के बारे में विस्तार से बताया है। तुमने इसे असीम रूप में प्रयोग करके अपने जीवन को समाज के लिए एक अनोखी मिसाल बनाकर प्रस्तुत किया है। कुछ ही वर्षों में एक ऐसा समय व काल खण्ड आएगा जिसमें लोगों में अत्यधिक जिज्ञासा जन्म लेगी। वे जानना चाहेंगे कि यदि जीवन संग्राम है, एक चुनौती है, एक निरन्तर प्रयास है, तो तुम जैसी साधारण दिखने व बोलने वाली स्त्री ने इतने कम अवधि में ईश्वर को इतनी गहराई से किस प्रकार व क्यों जान लिया?

उनके मन में विचार आने दो। मनुष्य में जिज्ञासा होना अति अनिवार्य है। उसकी प्रगति अवश्य होगी। परन्तु वे कितना भी अपना माथा मार ले, वे कभी भी जान नहीं सकेंगे। रहस्य है इस पहेली में – जब तक मैं नहीं चाहता कि किसी मनुष्य को कोई बात का भेद खुल जाए या मालूम हो जाए, उससे मेरे द्वारा ढकी हुई गुत्थी या पहेली खुल जाए, तब तक संसार का हर एक प्राणी वो छुपे, ढके या अनभिज्ञ विषय को जानने में असफल ही होगा।

तुम्हारे विषय में मैं आज सोमवार 23 सितम्बर 11.22 सुबह के शुभ मुहूर्त पर बताता हूँ ।

तुमने मुझे संपूर्ण रूप से जाना है। मैं तुम्हारे पास किसी भी क्षण अकस्मात प्रकट हो जाता हूँ। तुम मेरे सामने एक नन्हे बालक जैसा हृदय लिए मन में शान्ति व मौन में रहती हो। मैंने इस आलौकिक क्षण में कभी भी तुम्हें कुछ माँगते नहीं देखा। सदा आभार, केवल आभार प्रकट होता रहता है, अथक आभार प्रकट किया है तुमने।

इसलिए मैं तुम्हारे समक्ष आया हूँ। तुमसे कह रहा हूँ –

विश्व में ही नहीं, पूरे ब्रह्माण्ड में सबसे बड़ी शक्ति यदि कोई है तो वो है मेरी इच्छा, ईश्वर इच्छा। विश्व में, तुम्हारे जीवन में जो मैं चाहता हूँ, वही होता है और आगे के सारे जीवन में होगा।

मनुष्य में इच्छा शक्ति सबसे बड़ी शक्ति है जो मैंने दी है, परन्तु संसार में जो सबसे बड़ी शक्ति है वो मेरे अन्दर जन्मे संकल्प की है। जो मैं चाहता हूँ, वो अवश्य होकर रहेगा। जो मैं नहीं चाहता, उस बात को कोई भी नहीं कर पाएगा। ईश्वर इच्छा ही सबसे बड़ी शक्ति है।

मैं तुमसे 3 कार्य करवाना चाहता हूँ। वे अवश्य इसी जन्म में पूर्ण होंगे।

पहला – तुम्हारा शरीर निर्विकारी व आखरी साँस तक स्वस्थ रहे। यह काया कल्प से हो रहा है। 495 दिनों बाद वह पूर्ण रूप से सम्पन्न हो जाएगा। तुमने इसे 1/3 पूरा कर लिया है।

दूसरा – तुम 134 पुस्तकें लिखोगी। पहले मैंने 121 सोचा था। तुम इसी जीवन में यह कार्य सम्पन्न करोगी।

तीसरा – तुम विश्व में सच्चे जिज्ञासु, साधक व मुमुक्षुओं को जगाओ, उनकी चेतना पूर्ण रूप से जागी नहीं। उनका आगे का रास्ता उन्हें पता नहीं है। तुम दिशा दिखाओ उन्हें। आगे जाकर 12 वर्षों बाद तुम्हारी पुस्तकें जन मानस को ज्ञान से भर देंगी। बहुत लोग जिज्ञासा जगाकर अपना जीवन पूरा पलट देंगे और समाज में धर्म, सत्य, योग व तप की पुनर्स्थापना होगी।

इस कारण हेतु मैंने तुम्हें लंबी आयु व पूर्ण स्वास्थ्य दिया है। जिन दुर्जनों ने ईर्ष्या कारण अनेकों वर्ष तुमको संताप व दुख दिए हैं, उनकी प्राण शक्ति मैंने अत्यधिक कम कर दी है। वे बुद्धिहीन, शक्तिहीन व संताप ग्रस्त हैं। आज से तुम एक भी ऐसा संकल्प मन में मत आने देना जो तुम्हारे मन में घबराहट पैदा करे। वे संकल्प दुष्ट लोगों के होते हैं।

तुम सदा से मेरी इच्छा पर चलती आई हो। तुमको मैंने संसार की सबसे बड़ी शक्ति का अनेकों बार अनुभव कराया है, भविष्य में और भी कराऊँगा। जिन श्रद्धालुओं को यह बात मानने में कष्ट नहीं होगा, वे तुम्हारे सान्निध्य से तेज़ गति से आत्म उन्नति करेंगे, वर्षों में नहीं कुछ महीनों में। उन पर मेरी पूर्ण कृपा बरसेगी। उन्हें देर नहीं लगेगी यह ज्ञात होने में कि यदि विश्व में जो सबसे बड़ी शक्ति है, वो ईश्वर इच्छा ही है। तुम सदा मेरे कहने पर जीवन जीती आई हो। तुम्हें आज यह आशीर्वाद मिला है – जो तुम्हारे समक्ष व सान्निध्य में सच्चे मन से आएगा, उसे मेरा कभी न कभी इसी जीवन में दर्शन अवश्य होगा।”

 

 

Exit mobile version