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ध्यान मन को सशक्त करने का अति उत्तम साधन है, ध्यान बिना सद्गति नहीं।

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ध्यान

  1.   ध्यान जीवन का मूल आधार है जिससे जीवन ईश्वर इच्छा पर जिया जाए।
  2.   ईश्वर इच्छा क्या है ? यह बोध केवल ध्यान द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। ईश्वर की कृपा ध्यान में परम शान्ति के रूप में प्राप्त होती है।
  3.  ध्यान से सन्मार्ग व सत्य प्राप्त होता है।
  4.  सत्य प्राप्त करने की अभिलाषा भी ध्यान द्वारा जगाई जा सकती है।
  5.  ध्यान किए बिना ईश्वर प्राप्त करना असम्भव है।
  6.  ध्यान अन्दर की ज्योति को जगाकर मन को प्रज्ज्वलित करता है।
  7.  ध्यान वह शक्ति है जिससे सम्पूर्ण विश्व, प्रकृति, ब्रह्माण्ड व परमात्मा को जाना जा सकता है
  8. अति पवित्र आत्मा, सर्व व्यापक परमात्मा का दर्शन सम्पूर्ण रूप से ध्यान से ही होता है।
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