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शान्ति ईश्वर ही तो है, परम सुख केवल मन की शान्ति देती है।

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शान्ति 

  1.  शान्ति ईश्वर का ही एक रूप है। मन में शान्ति नहीं होती तो जीवन दुखदाई है। शान्ति भंग यदि हो जाए तो ईश्वर का स्मरण करो।
  2.  शान्ति द्वारा मनुष्य जीवन की सारी समस्याओं का निवारण कर सकता है। ध्यान द्वारा शान्ति प्राप्त करो।
  3.  शान्ति मन की अव्यवस्थित तरंगों को पूर्ण रूप से लय करती है। मन में तरंगों का लय होना शान्ति है।
  4.  ईश्वर आगमन शान्ति से होता है। मन में शान्ति जब अधिक बार अनुभव करो तो जान लो ध्यान तुम्हारा सशक्त है।
  5.  विश्व में चारों ओर शान्ति फैलाओ। यह अति शुभ कर्म है।
  6.  मन में शान्ति को ध्यान द्वारा अनेकों बार स्थापित करो। इससे धरती में पूर्व कृत पाप नाश हो जाएँगे, उन लोगों को क्षमा करो।
  7.  शान्त मन निर्दोष होता है। शान्ति में से जन कल्याण करने की प्रेरणा आती है।
  8.  ध्यान से शून्य में प्रवेश करो। शून्य में अविरल शान्ति है। अविरल शान्ति ईश्वर साक्षात्कार ही तो है।
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