#42
ॐ
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“यदि हम मिल पाए कभी एक बार भी इस जन्म में,
मैंने यह आप से कहा था मेरे प्रभो, बस इतनी कृपा करना।
एक बार मैं तुम्हें जी भर के देख लूँ, तुम मेरे
हृदय में सदा के लिए बस जाना, मेरे पास सदा रहना।
यदि आ गए आप और यह रहस्य होगा हम दोनों
के बीच, हमारे बीच में कभी भी संसार को मत लाना।
मैं नहीं चाहती हूँ कि संसार में कोई भी जाने
कि हम कभी मिले भी थे, क्योंकि इसमें केवल हम दोनों ही हैं।
मेरा प्रेम अति निर्मल, निष्पाप है, मुझे केवल आप से
प्रेम है, मैं केवल आपके ह्रदय में स्थिर स्थान चाहती हूँ।”
आपने तुरंत शान्त स्वरूप में कहा, “ऐसा तो आज
तक मुझसे किसी ने नहीं माँगा या कहा !
तुमने मुझे यह भी कहा था मुझे सब याद है –
“भूल कर भी हे प्रभो, यदि मैं आप तक पहुँच पाऊँ और आपको देख लूँ।
तो यह बात आप किसी से भी न बताना।
मुझे कोई न जाने, न पहचाने बस इतना मैं चाहती हूँ।”
मैंने तुमसे कहा था, “ऐसा तो किसी ने पहले
न मुझसे कहा या न माँगा था, आज पहली बार यह हुआ है।
मैंने यह अभी अभी चाहा है और ऐसा होगा –
तुम मुझसे एक बार नहीं, अनेकों – अनेकों बार मिली हो, यह सबको ज्ञात होगा।
तुम्हारे और मेरे बीच अब कोई फासला नहीं,
हम एक नहीं अनेक – अनेक बार मिलते रहेंगे ही, अनन्त तक।
मेरा प्रेम इतना विशाल है, मेरा प्रेम इतना
घनिष्ठ है, वह इतना सीमाहीन व अनन्त है कि उसकी थाह नहीं।
तुम मुझसे अनन्त प्रेम करती हो, तुम्हारी भक्ति
अपार है, बदले में मैं तुम्हें मेरा प्रेम भी अक्षय व अन्तहीन ही दूँगा।
यह संसार आज जान ले ऐसी भक्ति मैंने
देखी नहीं जो कोई केवल गुमनाम रहना चाहता हो मुझे पाकर भी।
परन्तु अब यह मेरी इच्छा व संकल्प दृढ़ है –
तुम्हें मैं ऐसा कार्य दूँगा करने को जिससे तुम्हें अक्षय यश मिलेगा।
संसार तुम्हें मिटाना या भुलाना चाहे तो वे केवल
विफल होंगे, जितना वे तुम्हें छिपाना चाहेंगे, तुम उतनी दमकोगी।
तुम्हारी पहचान संसार मुझसे करेगा क्योंकि पुरातन
ऋषियों को धरती पर विशेष कलियुग में उतार लाने की।
तुम्हें मैंने अनन्त शक्तियाँ दी हैं; मेरी विशेष
कृपा दृष्टि तुम पर से एक क्षण भी कम नहीं होगी, यह संसार जान ले।
मैं तो तुम्हारा सारथी हूँ, तुम्हें अब संसार में
धर्म व सत्य के लिए उतरना है; धर्म युग ही सत्य युग होता है।
तुमसे मैं उस धर्मयुग की तैयारियाँ करवा
रहा हूँ जो आज से करीब ९९२६ वर्ष बाद आएगा।
तुम्हें मैं अनेक अस्त्र – शस्त्र व कार्य शक्ति
दूँगा जिससे तुम्हें पूर्ण सफलता मिलेगी; तुम सदा विजयी रहोगी।
धर्म व सत्य की स्थापना करो, पाप नाश
करो, सत्य के सब में चिराग जलाओ, अन्धेरे को मन से भगाओ।
इसी आशीष के साथ यह हमारी वार्ता ख़तम होती है,
परन्तु याद रहे, तुम्हारा ह्रदय मेरा घर है, मैं किसी भी पल में आ सकता हूँ।”
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मां, आपकी नई कविता बहुत ही मर्मसपर्शी है। पर सच कहूं तो इस बार पढ़ते हुए लग रहा था कि इसे नहीं पढ़ना चाहिए, क्यूंकि यह तो दो प्रेमियों के बीच की अत्यधिक आत्मीय बातें हैं। इसे जानने का अधिकार किसी और को नहीं है। लग रहा था जैसे छुपकर किसी और की निजी बातें सुन रहा हूं, और फिर ऐसी हरकत की ग्लानि भी हुई। इतनी घनिष्ठ भावनाओं को दुनिया के सामने लाने के लिए आपको नमन।
मैनें पहले भी कहा है कि आपकी इन कविताओं का माधुर्य और अति निर्मल रस कठोर हृदय भी पिघला सकता है, नास्तिक को आस्तिक बना सकता है। आज लगता है जैसे फूल की पंखुड़ियों को विरह के आंसुओं की चाशनी में भिगोकर इस कविता को लिखने वाली कलम बनी होगी। ईश्वर भक्ति में लिखी गई कविताएं ज़्यादातर ईश्वर की महिमा का गुणगान करती हैं। परंतु, आपकी कविताएं प्रेम पत्र हैं। इसमें ईश्वर की सर्वव्यापी शक्तियों का वर्णन नहीं बल्कि दो प्रेमियों का एक दूसरे को पाने के लिए त्याग, तप और तत्परता झलकती है। और इस कहानी में योग के लिए तृष्णा और योग के बाद वरदान, इन दोनों अवस्थाओं के बीच में युग परिवर्तन का महाकाव्य चलता है।
मां, मैं कभी भी आपकी इन सूक्ष्म भावनाओं की समीक्षा नहीं कर सकता। पर अपने शब्दों से ऐसे प्रेम को प्रणाम करता हूं। इन कविताओं की एक दिन हमें किताब भी छापनी चाहिए।
🙏🏻❤️🙏🏻
प्रिय पुत्र रोहित,
यह मेरी आत्मा की ईश्वर से दारूण पुकार थी, मुझे उन से केवल प्रेम चाहिए था । मैं नहीं रहूंँ, ईश्वर रहे यही चाहा था मैंने । सच्चा प्रेम त्याग में होता है, ऐसा मैंने जाना था। मैं ईश्वर के मन में सदा कैसे बस जाउँ, इच्छा केवल यही थी ।
और
मैं भी चाहती हूंँ, मेरी हिंदी कविताओं की पुस्तक अवश्य बने। यह काम तुम से होगा ।
मेरा आशीष ।
तुम्हारी माँ
Dear Rohit, you had said to me a few days here – मां, मैं कभी भी आपकी इन सूक्ष्म भावनाओं की समीक्षा नहीं कर सकता। पर अपने शब्दों से ऐसे प्रेम को प्रणाम करता हूं। इन कविताओं की एक दिन हमें किताब भी छापनी चाहिए।
Please know that I have just finished a series of 7 posts in Hindi which will be published on Jyoti Marg blog one by one. We will make a book out of all these Hindi posts. They are out of my acute meditations in which God has spoken to me and gave me many insights to perplexing issues related to my past and who finds God.
God bless you.
Yours Ma