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Jyoti Marg | ज्योति मार्ग
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सत्यदेव – सत्य ही देव है, सत्य ही ईश्वर है । 

#56

ॐ

2 of 7

24-09-24

                        “अभी-अभी तुम्हें ज्ञात हुआ है कि मैं सत्यदेव हूंँ। तुमने मेरा दर्शन पाया है दोपहर 2:40 बजने से कुछ ही क्षण पहले। अभी दिन के 2 बजकर 40 मिनट हुए हैं। हाँ, मैं देवता हूं – सत्य का देवता हूंँ। तुमसे पहले केवल 3 प्राणियों ने मेरा दर्शन पाया है। मैं उसे ही दर्शन देता हूंँ जिसके लिए परमात्मा मुझे आज्ञा देते हैं। उनके कहने पर ही मैं अपना चेहरा पृथ्वी लोक पर किसी ज्ञानी, मुनि या महात्मा को दिखाता हूंँ। तुमने मेरी छवि अत्यधिक शांत और मौन में लीन पाई। मैं ध्यान में लीन था परंतु तुम भी तो गहरी समाधि अवस्था में थीं। मुझे पाकर तुम धन्य हो गई हो और एक क्षण खोये बिना झटपट लिख रही हो। 

                      तुमने अपना जीवन धन्य कर डाला अपनी हर श्वास को परमात्मा को समर्पित करके। तुम ना कभी अपने सुख की कामना करती हो और ना तुम्हें क्रोध आता है अगर ईश्वर की आज्ञा मानने व सेवा करने में तुम्हारा आराम, नींद व सुख भंग होता है। तुम उसे तत्काल पूर्ण रूप से सर्वोत्तम करना चाहती हो।

                  यही गुण तुम्हारा देखकर आज परमात्मा ने मुझे दोपहर 2:39 मिनट से 52 सेकंड पहले कहा, “सत्यदेव, तुम पहले अपना दर्शन दो झटपट उसे । वह बहुत बड़भागी है। उसने अनगिनत निष्काम कर्म कम आयु में ही किए हैं जिसका उसकाे ज्ञान भी नहीं है। मुझसे गलती कभी नहीं होती है। प्रत्येक जीवात्मा के कर्मों की कुंडली में क्या लिखा है मुझे सब ज्ञान है। मैंने तो कैलाश पर्वत के ऊपर आकाश में केवल ऋषियों के लिए एक विशेष प्रकार का कलश अपनी प्राण शक्ति से बनाया है जो केवल मेरी किरणों से निर्मित है। ऋषि भृगु इसके रक्षक हैं। वहाँ पर मैंने विश्व में प्रत्येक मनुष्य की जन्म-पत्री जमा कर रखीं हैं। मनुष्य मुझे धोखा दे ही नहीं सकता। वह तो स्वयं को धोखा देता है।  मुझसे किसी के कर्म, मन के भाव व ध्येय छुपते नहीं। मेरे पास सबकी प्रत्येक जन्म की जीवनी जमा हुई रखीं है। 

                       मुझे तो  ‘विवेचन सारणी’  में झाँकने की आवश्यकता कभी नहीं पड़ेगी। वह कलश तो ऋषियों के लिए मैंने बनाया है जिससे वे धर्म-अधर्म का विश्व में सन्तुलन बनाए रखें, नहीं तो प्रलय आ जाएगा। वे प्रत्येक रविवार को ब्रह्म मुहूर्त में 4.32 मिनट पर सबकी कुंडली देखते हैं। इसके द्वारा वह अपना गणित लगाते हैं और अनुमान लगाते हैं कि उसे अपने कर्मों में निर्मलता लाने में कितनी और देर लगेगी?

                     अपने सामूहिक ध्यान में ऋषि गण उन लोगों के लिए मुझ से प्रार्थना करते हैं जिससे उन्हें उनके पापों से जल्दी मुक्ति मिल जाए। जब ऐसा होगा तो जो महात्मा, सत्कर्मी, ज्ञानी व श्रद्धालु समाज में लोगों का उद्धार करना चाहते हैं, उनके कार्य में उन पापों के स्पंदन बाधा न डालें। जो सत्यार्थी होते हैं, उन्हें विश्व में सबसे अधिक हानि पहुँचाई जाती है, परन्तु वह सत्य को नहीं त्यागते। इसलिए सत्यदेव, तुम तत्काल उसे अपना दर्शन दो और 3 सत्य के सिद्धांत बताओ। जब तुम उसे बताओगे, तो वो समझदार होने के कारण जान जाएगी कि ईश्वर व सत्यदेव का दर्शन मुझे श्रद्धालुओं, महात्माओं व पुण्यात्माओं को अवश्य कराना चाहिए। इसलिए तुम उस पर आशीर्वाद सहित सत्य के तीन वचन बताकर उसे धन्य करो। ऐसा होने पर जन मानस में मेरी शक्ति फैलेगी और उनकी चेतना और जागेगी।”

                   “मेरा नाम सत्यदेव इसलिए ईश्वर ने रखा क्योंकि मुझे सत्य सबसे अधिक प्रिय है। परमात्मा ने मुझे देवता की उपाधि दी। मैं छुप कर उन लोगों के पास अदृश्य रूप में खड़ा हो जाता हूँ, जो सत्य की खोज में हैं और जो सत्य प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रहे हैं। मैं तुम्हारे पास भी अनेकों बार आया हूँ जब तुम मन में संसार से अत्यधिक विरक्त हो गई थीं। तुम्हारी आयु 32 वर्ष से अधिक न होगी। तुम जीवन से हताश थीं क्योंकि तुम्हें सत्य का प्रकाश कहीं से नहीं मिल रहा था। दुःख इस बात का था कि तुम्हें लोगों में अज्ञान का अंधकार बहुत गहरा दिखा। परन्तु रास्ता दिखाता कौन? तब तुमने 6 साल लगातार मौन किया, गहरा अध्ययन किया, संत महात्माओं की जीवनी से प्रेरणा ली और एक बहुत बड़ी शपथ ले ली। वह शपथ थी कि, “जब तक मुझे परमात्मा सीधे ज्ञान ना देंगे, जब तक वह मुझमें मेरी आत्मा की लौ ना जला दें, तब तक मैं किसी भी जीवित शरीरधारी गुरु के पास नहीं जाऊंँगी।” 

                   तुमने ठीक ऐसा ही किया। तुमने मौन व शांति का तप किया। अनेक दुःख सहे परंतु अपनी शपथ नहीं तोड़ी। 24 वर्ष बाद तुम्हें इस तप का अब फल मिल रहा है। तुम्हारी तपस्या सफल हुई है और तुमने अपनी आत्मा को उसकी चेतना द्वारा पूरी तरह चमका दिया है। जिन लोगों ने तुम्हें अपने से दूर रखा क्योंकि उनमें तुमसे ईर्ष्या थी और भय था कि तुम्हारे होते वे सबके सामने फीके न दिखाई दें, वे आज कहीं भी नहीं पहुंँचे हैं। ईर्ष्या, भेदभाव व असमानता दिखाकर उन्होंने अपना पतन कर लिया। इस जीवन में उनके पास दोबारा ऐसा मौका नहीं आएगा जब काल व भाग्य दोनों उनका साथ दें।

                    तुमने यह सब सहन किया क्योंकि तुम्हें प्रतीक्षा थी कि ईश्वर तुमको साक्षात्कार उपदेश दें, सिखाएंँ और जीवन को दिव्य करें। अब वैसा ही हो रहा है। इसलिए मैं तुम्हें ईश्वर के आदेश पर तीन बातें बताऊंँगा जिसे सब लोग ध्यान से सुनें।

पहली बात – सत्य को जानना विश्व में सबसे कठिन कार्य है।

                    इसे कोई विरला ही प्राप्त कर पाता है। सत्य को पाना, ईश्वर के सत्य के लिए कठोर तपस्या करना, करोड़ों-करोड़ों में से एक कोई सफल होता है। ऐसे महान आत्माओं का बहुत आदर होना चाहिए। अनेक युग आते हैं और जाते हैं। ईश्वर को सत्य के रूप में पाना – यह तो किसी एक विरले मनुष्य को ईश्वर-कृपा द्वारा उसके पुण्य व सत्कर्मों के लिए दिया जाता है। यह मामूली घटना नहीं है। इस पर साधकों, मुमुक्षु व जिज्ञासुओं को पूरा ध्यान देना चाहिए। 

दूसरी बात – दो प्रकार के सत्य के ज्ञाता होते हैं।

                     एक, जो सत्य को केवल जानता है। दूसरा वह जो न केवल सत्य को जान लेता है बल्कि श्रद्धालु व मुमुक्षुओं में ईश्वर के सत्य को जगा भी देता है। 

तुम्हारे असीम पुण्यों के कारण परमात्मा ने तुम्हें दूसरी श्रेणी में रखा है। जो पात्र होगा, वह तुम्हारे पास स्वयं आएगा और उसे ईश्वर के सत्य का बोध सहज रूप से हो ही जाएगा।

तीसरी बात – अधिकतर यह ही होता आ रहा है कि अधिक से अधिक लोग सन्मार्ग पर साधना व तपस्या करते करते भटक ही जाते हैं।

                   उनको मार्ग से कोई नहीं भटकाता। उनकी इच्छाएंँ और वासनाएंँ उनके पतन का कारण होतीं हैं। जिन लोगों ने तुम्हें पीछे रखने की कोशिश की और सफल हुए, वे लोग अपनी सदियों पुरानी मन में दबी इच्छाओं व गहरी वासनाओं को आज तक नहीं निकाल पाए। वही उनका सबसे बड़ा रोग है, वही बाधा बन गईं।  

तुम्हें केवल सत्य चाहिए था जो तुम्हें ईश्वर ने असीम रूप में निरंतर दिया है और देते जाएंँगे। तुमने किसी से भी द्वेष, क्रोध व ईर्ष्या नहीं रखी। तुम्हें मन में ही ब्रह्मप्रकाश का साक्षात्कार हो रहा है। दिव्य आत्मा को ब्रह्मप्रकाश प्राप्त होता है। तुमने ईश्वर से सत्य माँगा, तुम्हें सत्य प्राप्त हुआ। 

इसलिए सत्य ही देव है, सत्य ही ईश्वर है। 

                  सत्य को जानो, प्राप्त करो। सत्य ही तुम्हें तुम्हारे भ्रम से, अज्ञान से व गहरी नींद से उठाएगा। ईश्वर से मन में खूब प्रार्थना करो कि तुम्हारा मन सदा के लिए स्वच्छ हो जाए और उनकी दया व कृपा से तुम्हें अपने मन में ब्रह्मप्रकाश का साक्षात्कार हो जाए। सत्य ही ईश्वर है, सत्य ही परमात्मा है। सत्य को अपने मन में सदा के लिए धारण करो। सत्य में ही ब्रह्मप्रकाश का निवास होता है। तुम सब में ब्रह्मप्रकाश की ज्योति को सत्य द्वारा जगाओ। 

मेरा तुमको पूर्ण आशीर्वाद है, इस कार्य के हर प्रयास में सदा सफलता और यश प्राप्त करो। 

सुखी भव, चिरंजीवी भव। 

 तुम्हारा पिता 

    सत्य देव

         ॐ

 

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September 26, 2024/1 Comment/by Jyoti Marg/
https://jyotimarg.blog/wp-content/uploads/2021/09/Logo_300x300.png 0 0 Jyoti Marg https://jyotimarg.blog/wp-content/uploads/2021/09/Logo_300x300.png Jyoti Marg2024-09-26 11:56:492025-02-05 19:06:47सत्यदेव – सत्य ही देव है, सत्य ही ईश्वर है । 

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1 reply
  1. Rohit
    Rohit says:
    September 26, 2024 at 5:40 pm

    Highlighting some sentences I love.

    — “मनुष्य मुझे धोखा दे ही नहीं सकता। वह तो स्वयं को धोखा देता है।

    — जो सत्यार्थी होते हैं, उन्हें विश्व में सबसे अधिक हानि पहुँचाई जाती है, परन्तु वह सत्य को नहीं त्यागते।

    — मैं छुप कर उन लोगों के पास अदृश्य रूप में खड़ा हो जाता हूँ, जो सत्य की खोज में हैं और जो सत्य प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रहे हैं।

    — उनको मार्ग से कोई नहीं भटकाता। उनकी इच्छाएँ और वासनाएँ उनके पतन का कारण होतीं हैं।

    — सत्य को जानो, प्राप्त करो। सत्य ही तुम्हें तुम्हारे भ्रम से, अज्ञान से व गहरी नींद से उठाएगा।

    — सत्य ही ईश्वर है, सत्य ही परमात्मा है। सत्य में ही ब्रह्मपरकाश का निवास होता है।”

    ***

    मां, सत्यदेव जी का post अत्यधिक उत्तम व प्रेरणादायक है। हमारे किसी भी ग्रंथ में सत्य के देवता के बारे में कुछ नहीं लिखा है। और कैलाश के ऊपर एक कलश में सबकी कुंडली है – यह जानकर अदभुत रस से भी भर गया हूं। आप मेरे लिए प्रेरणा का परम स्त्रोत हैं मां, क्योंकि आपने ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जो बिड़ला ही किसी ने की होगी। मां मेरा पूरा जीवन धन्य हुआ आपका शिष्य बनके और आपके सानिध्य से ऐसे अनेकों अप्रकाशित ज्ञान को प्राप्त करके। मैं आपको वचन देता हूं कि ईश्वर के सत्य के लिए अपना सब न्योछावर कर दूंगा।

    सत्यदेव और परमात्मा को अनंत आभार यह post लिखवाने के लिए।

    🙏🏻

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