#36
ॐ
जीवन एक संग्राम है, उसे निर्भय होकर जियो।
जीवन सदा बदलता रहता है, उसका डटकर सामना करो ।
जीवन सदा नए नए मोड़ लाता है, उसको जीकर ज़रूर देखो।
कभी न ठहरने वाली गति को जीवन कहते हैं, उसे मत रोको।
जीवन की धारा अपने कर्मों से जोड़ लो, प्रवाह अवश्य तुम्हारी सहायता करेगा, तुम उसे एक दिशा दो।
कभी न थमने वाली गतिविधियों को ही जीवन कहते हैं, तुम उससे प्रेरणा लो।
जीवन की कठिन यात्रा विश्वास, शान्ति, प्रेम, धैर्य व मन की मौन से अत्यधिक प्रगतिशील होती है।
ईश्वर की कृपा व सान्निध्य से हमारा जीवन अन्त में एक दिन केवल सुख व शान्ति प्रदान करता है।
हमें ईश्वर को केवल सहर्ष आत्म-समर्पण करना होता है; सब प्रयत्नों का फल देने वाला साक्षी ईश्वर होता है।
मन में धैर्य व शान्ति रखो, ईश्वर जब हमें अपने सान्निध्य व कृपा का पात्र बनाने वाले होते हैं, पहले हम संग्राम करते हैं।
संग्राम जीवन का अमृत मंथन होता है, जिसने हमारे जीवन में विष भरा था, उसे संग्राम से ही अन्त करना होता है।
बिना बादल गरजे तो वर्षा भी नहीं होती, वर्षा की बूंदों बिना तो नए बीज भी अंकुरित नहीं होते।
कुछ समय तो मन को घुटना होता है, कठिन परिस्थितियों में से निकलना होता है, उषा की किरणें अन्धकार को चीरकर निकलतीं हैं।
तुम्हारा जीवन भी कुसुमित हो जायेगा जब तुम ईश्वर इच्छा पर चलोगे; ईश्वर को सब ज्ञात है हमारे हित में क्या है, हमें तो केवल समर्पण करना है।


Charan Vandana Amma … 🙏🌺🙏