#60
ॐ
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परमात्मा –
“आगे अब क्या होगा, वह तुम मुझसे अवश्य सुनो, मैंने तुम्हारे भविष्य सुनहरे अक्षरों में लिख दिया क्योंकि तुम ने मेरी सारी बातें हैं जो मानी।
मेरी इच्छा में ब्रह्माण्ड के लिए उद्धार व कल्यण ही होता है, मनुष्य के लिए केवल उसकी आत्म उन्नति, कर्मों की सफाई व उसका मन का फैलाव |
मेरी इच्छा में इतनी बडी शक्ति है कोई भी इसका अनुमान लगाने मे असमर्थ है क्योंकि उसकी बुद्धि हमेशा छोटी ही पड़ेगी – फिर मैं प्रयत्न करूँगा सिर्फ़ तुम्हारे लिए।
मैंने साढ़े तीन करोड़ वर्ष पहले संकल्प लिया था कि क्यों न कोई एक ऐसा धरती पर कार्य हो जिसे केवल एक नारी की, उसकी बुद्धि व शक्ति का प्रदर्शन हो।
नारी का मन मातृत्व भाव के कारण सदा कोमल व ममता से भरा होता है परन्तु उसकी चेतना, आत्मा को प्रकाशित करने की क्यों न कोई कभी सोचे?
धरती पर कभी भी जब कोई एक समय ऐसा आएगा जब संसार में अत्यधिक लोभ, क्रोध, भोग व सम्मोहन वाली नकारात्मक शक्तियाँ अत्यधिक बढ़ेंगी ।
तब मैं मेरी गुप्त शक्तियों को केवल एक बार ही धरती पर उताँंरुगा अवश्य जिससे धरती पर मानवता का खूब कल्याण हो – वह अल्पकाल के लिए होंगी।
मैं कार्य संपन्न होने पर उन शक्तियों को फिर से उनके स्थान पर भेज दूँगा । जब तक वह किसी मनुष्य में होंगी, वह चमत्कारी कार्य करेंगी ।
वे शक्तियाँ मैंने इस कलियुग में तुम्हें सौंपी हैं। तुम उन्हें भली भाँति जन कल्याण हेतु उपयोग में ला रही हो – तुम पूरे जीवन अपने कार्य के लिए उन्हें प्रयोग करो।
लोग तुम्हें अकस्मात अपने घर बुलाऐंगे और आदर सत्कार करेंगे, वे चाहेंगे तुम उनका कल्याण व उद्धार करो; वे मन से तुम्हारे आगे झुकेंगे – तुम उन्हें अपना आशीष दो।
कभी भी अब कोई तुम्हें धोखा नहीं देगा, हैरान मत होना अगर वे तुम्हें अपने दिल की बात, राज़ व दुःख बताऐंगे । तुम उनका उपचार करो,कल्याण करो – वे तुम्हारे हैं।
उन लोगों की दिन दुगनी रात चौगुनी आत्मा उन्नति होगी, उन्हें न केवल मोक्ष मिलेगा दुःखों से उन्हें ईश्वर साक्षात्कार ज्ञान, शान्ति व तप द्वारा मिलेगा।
उन सबको कभी न पहले या दुबारा कभी न तुम जैसी गुरू माँ मिलेगी जिस में प्रत्येक के लिए इतना प्रेम, करूणा व दया झलकेगी – तुम उनका उपकार करो।
साठ साल तक तुमने बिना एक दिन भूले मुझे निरन्तर स्मरण किया, बचे पाँच साल, उसमे भी तुमने केवल तप किया है – पाँच वर्ष की आयु में तुमने एक स्त्री की जान बचाई है।
इतने छोटे बालक ने इतिहास में कभी किसी की जान नहीं बचाई है उस पुण्य का फल अब मैं तुम्हे दूँगा – तुम्हारा अत्यधिक आदर सत्कार प्रतिदिन होगा।
मेरी शक्तियों को अब तक तुमने सच्चा प्रयोग किया है, मैं तुम्हें अब और वो शक्तियाँ दूँगा जिससे तुम्हारा आगे का काम एकदम आसान व तत्काल हो जाएगा।
तुम्हारी अन्त श्वास तक तुम्हें सदा अपनी छत्रछाया में रखुँगा । आगे के सारे जीवन में तुम्हें मैं बहुत आराम दूँगा – इतने सारे जीवन में तुमने अथक किया परिश्रम है।
इन्हीं शक्तियों को मैं तुम्हें अगले सारे जीवनों में देता आऊँगा जब तक सत्य युग नौ हजार नौ सौ पचास वर्ष बाद न आ जाए – ये शक्तियाँ तब लुप्त हो जाएंगी।”


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