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Jyoti Marg | ज्योति मार्ग
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Jyoti Marg

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Entries by Jyoti Marg

Uncategorized

कभी न जो तुमने सोचा था, वो तुम अब करो ।

#59 ॐ 5 of 7 परमात्मा – “मन एक अद्भुत शक्ति है। इसमें अपार संभावनाएँ छुपी पड़ीं होतीं हैं। मन की सबसे बड़ी शक्ति है इच्छा-शक्ति। आदिकाल में ही जब मैंने मनुष्य की पहले-पहल रचना की थी, मैंने उसे इच्छा-शक्ति का नाभि में स्पंदन द्वारा प्रवेश किया। इच्छा-शक्ति मैंने सबसे पहले दी क्योंकि मैं चाहता […]

October 7, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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अपना जीवन ईश्वर को समर्पित करो । 

#58 ॐ 4 of 7 परमात्मा  –  “यदि तुम यह जीवन ईश्वर को समर्पित कर दो, मन तुम्हारा कभी भी विचलित नहीं होगा। जीवन का सच्चा सुख मन में ध्यान द्वारा उतारी गई शान्ति है। जिन मन में सदा किसी न किसी वस्तु, संसारी इच्छा या इन्द्रिय सुख प्राप्त करने की चेष्टा रहती है, वे […]

October 3, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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बिना लक्ष्य के जीवन निरर्थक है।

#57 ॐ 3 of 7 परमात्मा – तुमने आज मुझसे पूछा था, “क्यों ये सारे गहरी नींद में सोए हैं? क्यों ये लोग केवल सांसारिक वस्तुएं पाकर इतने खुश हैं? मुझे तो यह लगता है कि यह सब लोग बेवजह ही जी रहे हैं। क्यों नहीं इन्हें समझ आता कि केवल समय रोज़ बेवजह यूँ […]

October 3, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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सत्यदेव – सत्य ही देव है, सत्य ही ईश्वर है । 

#56 ॐ 2 of 7 24-09-24                         “अभी-अभी तुम्हें ज्ञात हुआ है कि मैं सत्यदेव हूंँ। तुमने मेरा दर्शन पाया है दोपहर 2:40 बजने से कुछ ही क्षण पहले। अभी दिन के 2 बजकर 40 मिनट हुए हैं। हाँ, मैं देवता हूं – सत्य का देवता हूंँ। तुमसे पहले केवल 3 प्राणियों ने मेरा दर्शन पाया […]

September 26, 2024 /1 Comment/by Jyoti Marg
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इच्छा शक्ति या ईश्वर-इच्छा बड़ी शक्ति?

#55 ॐ 1 of 7 परमात्मा – “तुमने आज से पूर्ण दस वर्ष पहले इसी तारीख़ व समय पर मुझसे निष्पाप मन से बालक की भाँति पूछा था, “हे भगवन्, मुझे कृपा करके बताएँ विश्व में आपकी बनाई हुई सबसे बड़ी शक्ति कौन सी है? मुझे परमाणु शक्ति मत कहना क्योंकि वे तो मनुष्य संसार […]

September 24, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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मौन पवित्र मन में होता है, मन में मौन रखो।

#54 ॐ 4 of 4 मौन   मौन का अर्थ होता है, विचार रहित एवं संकल्प रहित।  इस अवस्था में ईश्वर मन में शान्त रूप में होते हैं।  मौन जब अकस्मात आ जाए, जान लो तुम्हारा मन साधना से अति पवित्र हो चुका है।  मन का मौन विचारों का अंत है परन्तु ईश्वर के अस्तित्व का […]

September 21, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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शान्ति ईश्वर ही तो है, परम सुख केवल मन की शान्ति देती है।

#53 ॐ  3 of 4 शान्ति   शान्ति ईश्वर का ही एक रूप है। मन में शान्ति नहीं होती तो जीवन दुखदाई है। शान्ति भंग यदि हो जाए तो ईश्वर का स्मरण करो।  शान्ति द्वारा मनुष्य जीवन की सारी समस्याओं का निवारण कर सकता है। ध्यान द्वारा शान्ति प्राप्त करो।  शान्ति मन की अव्यवस्थित तरंगों को […]

September 21, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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ध्यान मन को सशक्त करने का अति उत्तम साधन है, ध्यान बिना सद्गति नहीं।

#52 ॐ (2 of 4) ध्यान   ध्यान जीवन का मूल आधार है जिससे जीवन ईश्वर इच्छा पर जिया जाए।   ईश्वर इच्छा क्या है ? यह बोध केवल ध्यान द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। ईश्वर की कृपा ध्यान में परम शान्ति के रूप में प्राप्त होती है।  ध्यान से सन्मार्ग व सत्य प्राप्त […]

September 21, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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प्राणायाम साधना की बुनियाद है। शान्ति की खोज के लिए पहली सीढ़ी है।

#51 ॐ (1 of 4) प्राणायाम  प्राणायाम पूजा है।  प्राणायाम समाधि का मार्ग है।  प्राणायाम अंतर्मुख होने के लिए अति आवश्यक है।  प्राणायाम जीवन को सुगम बनाता है क्योंकि उस से हमारी श्वासों की गति तीव्र से मध्यम हो जाती हैं।  किसी भी समस्या का समाधान प्राणायाम करने के बाद निकाला जा सकता है।  प्राणों […]

September 21, 2024 /1 Comment/by Jyoti Marg
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कल किसने देखा है?

#50 ॐ आने वाला कल एक रहस्य की चादर से ढ़का है, किसे पता उसमें क्या-क्या छिपा है?  सुनहरे अक्षरों से भविष्य लिखा है या ढ़ेर सारी समस्याओं का हमको सामना करना पड़ेगा?  जो बीज अतीत में हमने इधर उधर डाले हैं, वे ही तो साकार होकर सामने आएँगे।  जो कभी न सोचा था वह […]

August 7, 2024 /0 Comments/by Jyoti Marg
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This blog is a humble attempt to deliver the direct messages of Parmatman or God to humanity, because the world is now ready.

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  • Gold Mine, your Atma!
  • A Journey that was never meant to end! – Parmatma

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  • Rohit on सत्यदेव – सत्य ही देव है, सत्य ही ईश्वर है । 
  • Rk Jain on प्राणायाम साधना की बुनियाद है। शान्ति की खोज के लिए पहली सीढ़ी है।
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