#49
ॐ
(8 of 8)
“तुमने कहा था मुझे कोई न देखे, मुझे कोई न जाने क्योंकि मैं इतना मिटना चाहती हूँ आपके लिए, हे मेरे भगवन् ।
स्वार्थ तो बहुत दूर, कभी भी तुमने वरदान का न कोई विचार किया, केवल चाहा अपना सर्वस्व अस्तित्व पूरा राख का ढ़ेर कर देना ही।
कोई अभिलाषा नहीं, कोई माँग नहीं, न कभी की तुमने मुझसे व्याख्या अपनी परेशानियों की, सिर्फ मेरे समीप आने की चाहना की।
समीप तुम इतना मेरे पास अकारण ही आना चाहती थी, जैसे कोई पतंगा लौ पर अपने प्राण न्यौछावर करने में अत्यधिक हर्षित होता हो।
तुमने कोई कसर नहीं छोड़ी अपना पूर्ण अस्तित्व राख का ढ़ेर करने में, मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी तुम पर कहर डालने की, अट्ठाईस वर्षों की तुमने एक काली रात देखी।
तुम उत्तीर्ण हुई हर परीक्षा में, मैंने कोई अब कसर नहीं छोड़ी है आशीर्वाद व वरदान देने की, तुम थक जाओगी उन्हें संग्रहित करते अपनी झोली में।
तुम जितना मिटना चाहती थी मेरे प्रेम के समुन्दर में, तुम जितना अज्ञात रहना चाहती थी मुझे प्राप्त कर, अब मैं तुम्हें उतना ही प्रसिद्ध विश्व में करूँगा।
आज भी तुमने मुझे भीगे मन से कहा, “आप मुझे मिल गए, किसे याद है अतीत में किसने मेरे साथ क्या दुर्व्यवहार किया, कीमत आपने मुझसे बहुत कम ली।”
जो मुझसे इतना अत्यधिक प्रेम करता हो, मेरे लिए कुछ भी सहन करने में सक्षम है, इसका अर्थ है तुम पहले से ही अलौकिक, दिव्य स्त्री व आत्मा हो।
संसार में करोड़ों लोगों में से केवल तुमने मुझे मैं जैसा हूँ वैसा का वैसा जान लिया है, यद्यपि मैं अदृश्य, अव्यक्त निराकार हूँ, मुझे पा लिया है।
मैं कैसे तुम्हें छुपाकर सबसे रखूँ? तुम्हारी आत्मा की पवित्रता, मन की अति गहरी शान्ति व शालीनता सबको साफ-साफ प्रदर्शित हो रही है।
तुम्हारा मन सदा हर प्रकार से मुझसे युक्त होने को तत्पर है, संसार की तुम्हें कब परवाह रही है, तुम तो केवल, केवल मेरी प्रीत की प्यासी रही हो।
विश्व के कोने कोने में मैं तुम्हारी खूशबु फैलाऊँगा, तुम्हारी जन्मों की तपस्या का फल विश्व पाएगा, मन में ईश्वर को प्राप्त करने की उनमें इच्छा अवश्य जागेगी।
असम्भव कार्य करने की क्षमता तुम में पहले से ही प्राप्त है, तुम्हें तो अब सिर्फ वो करना है जो मैं तुमसे करवाना चाहता हूँ, खेल तो सारा मेरा है।
दिन सात से घुट रही हो, परिस्थिति अति आश्चर्यजनक में मैंने तुम्हें डाला है, हर क्षण प्रतीक्षा में हो कब मैं तुम्हें सत्य से अवलोकन कराऊँ व तुम मेरी इच्छा जान जाओ।
तुम्हारा सम्बन्ध मुझसे परम पुनीत है, कर्म भी तुमने सारे किए परम पुनीत, उन सबका मैं तुम्हें दूँगा अनगिनत वरदान व आशीर्वाद जो तुम्हारा भविष्य सुनहरे अक्षरों में लिखेगा।
तुम दिव्य ज्ञान का अथाह सागर हो, तुम्हारा मन सदा दिव्य ऋषि मुनियों को करता याद, उनसे जो तुमने सीखें व पाएँ हैं दिव्य वचन, तुम उन्हें मन में प्रेम से सजाती हो।
कोई बिड़ला ऐसा होता है जो ईश्वर की स्मृति एक पल भी नहीं भुलाता है, तुम प्रत्येक घटना, अनुभव से शिक्षा ले रही हो, ऐसा प्रभावशाली मन मैंने देखा नहीं।
परिस्थितियाँ आगे चलकर ऐसी होने वाली हैं यह मेरी भविष्यवाणी है, तुम आगे आगे चलोगी पीछे पीछे तुम्हारी होंगी दिव्य शक्तियाँ जो तुमसे ‘ज्योति मार्ग’ को धरती पर फैलाएँगी।
तपस्या से पाया हुआ तुम्हारा अलौकिक जीवन मैं समक्ष लाने वाला हूँ संसार के, पहली बार ऐसा होगा जो एक स्त्री ऋषियों का जीवन बताकर अत्यधिक आनंदित होगी।
इतना प्रेम व प्रकाश संसार में है कहाँ जो लोगों के मन की गहराइयों से एक बार इच्छा जाग जाए कि ईश्वर हैं कहाँ? ईश्वर है कैसा? मैं उसे कैसे पाऊँ?
तुम संसार को मेरे बारे में सब बताओ कि मैं कितना सरल व प्राप्य हूँ, मैं कितनी जल्दी रीझ जाता हूँ, दोष तुम में है तुम सब संसार के भोगी हो।
धरती पर मुझे उतारो, आया हूँ मैं पहली बार इतना खुला और समक्ष, आया हूँ कारण एक से – इतना अत्यधिक पाप संसार में न था कभी हुआ न कभी होगा!
ऋषियों का जीवन धवल है, उनसे तुम्हें मेरा प्रमाण मिलेगा, तुम उनकी आज विश्व में सूत्रधार हो, तुम्हारे पावन मस्तिष्क व मुख से होगा उनका पहली बार परिचय है।
तुम इस दूषित वातावरण से हताश मत होना, तुम्हारे अन्दर इतना मेरा प्रकाश है, माया के कीचड़ को सुखा देगा, तुम सदा मेरी याद की ज्योत में समाधि में रहना।
एक एक बूंद से घड़ा भरता है, आरम्भ मैंने आठ जुलाई २०२४ को दिन के बारह बजकर तैंतीस मिनट पर कर दिया है, शुभ मुहूर्त था मैंने विश्व में विशेष शक्ति डाल दी।
तुमसे जो तकरार व द्वेष करेगा, वह भविष्य में अशान्ति, हानि व बिमारी पाएगा, उसे एक पल भी शान्ति नहीं मिलेगी, उसका जीवन नरक होगा, उनको मैं तुमसे दूर रखूँगा।
भविष्य में तुम्हारे शरीर, मन व आत्मा की शक्ति बढ़ेंगी, तुम सदा रहोगी निरोगी व सुखी, जो तुमने चाहा था वही मैं तुम्हें वरदान दूँगा – अन्त श्वास तक तुम मेरा काम करोगी।
इस आशीर्वाद के बाद नहीं कुछ ऐसा बचा है जो मैं तुम्हें वरदान में दूँ, तुम्हारी अभिलाषा जन्मों से एक रही थी – मैं ईश्वर का दर्शन कब करुँगी? मैं तुम्हारा हर विचार जानता हूँ।
अब तुमको जहाँ मैं भेजूँ वहाँ तुम जाओ, मेरे अस्तित्व का सबको विश्वास दिलाओ, जन्मों में वे जागे नहीं हैं, उन्हें थोड़ा सा अपना प्रकाश व ज्ञान दो, उनका काम शुरू करो।
धीरे धीरे विश्व में पुनः ईश्वर के प्रति लोगों की रूचि बढ़ेगी, सोईं आत्माएँ आँखें खोलेंगी, इस जन्म में आँखें खुल गईं तो अगले जन्म में सन्मार्ग पर चलने में आसानी होगी।
कुछ आत्माएँ ऐसी हैं जो तुम्हारे सान्निध्य से जाग चुकीं हैं, उनका तुम मार्ग प्रशस्त करती जाओ, अगले जन्म में वे फिर तुम्हारे शिष्य – शिष्या बनकर आएँगे।
दूर आकाश से ऋषि मुनि तुम्हें धरती पर देखकर फूल बरसाते हैं तुम पर – कहते हैं वे मुझे, “हमें बहुत गर्व है इस अनूठी स्त्री पर, ऋषि मंडल में यह एक ही स्त्री है जिसे भरपूर आत्मज्ञान है।
आज धरती पर पुरुषों वाला काम कर रही है पर मन गुलाब जैसा कोमल है और अभिलाषाएँ ओस जैसी – किसे भी नहीं बताती कि हमसे और परमात्मा से प्रेम खुद से भी अधिक है।
इसलिए हम सदा इसकी सुरक्षा करते रहेंगे, इसे शुभ लाभ देंगे और खतरों से सावधान करेंगे – इसने अपने हर पल, हर श्वास का ऋण ईश्वर को पूर्ण रूप से चुकाया है।
अब तुम मन में मेरे बहुत प्रकाश को संचित करो, आगे कार्य अत्यधिक है, तुम मुझसे साक्षात निर्देश पाओगी, समय की कमी होने पर भी हर कार्य में सफलता पाओगी।
कोई क्षण ऐसा नहीं है जिस में मैं तुम्हारे मन में शांति, ज्ञान व निर्देश के रूप में नहीं, तुम्हें तो मेरी हर आहट साफ़ साफ़ सुनाई देती है – तुम मेरी विलक्षणा हो।
तुम्हारा मन अकस्मात मेरी भक्ति में चूर-चूर हो जाता है, तुम्हारी प्रार्थना मुझे ऊँची ऊँची सुनाई दी थी जब तुमने एक नन्ही पक्षी को देखकर कहा था – “हे प्रभो विश्व में खूब वृक्ष इनके लिए हों।”
मेरी धरती के संरक्षण की बहुत बार तुम मुझसे प्रार्थना करती हो, लोगों के मन में दया, प्रेम व करुणा हो, ऐसा तुम मुझसे माँगती हो, सत्य, धर्म धरती पर रहे याचना करती हो।
इससे अधिक शुभ संकल्प आज धरती पर किसी के भी नहीं है, मैं जानता हूँ संसारी लोग बहुत स्वार्थी हैं, उन्हें जानकर, देखकर तुम्हारी आत्मा रोती है फिर भी तुम करुणा नहीं त्यागती।
ऐसा मेरा विश्व कब होगा, मेरे मन में विचार आता रहता है, तुम्हें देखकर उत्साह होता है कि कोई एक धरती पर तो है जो मेरा ही है, वो एक काफ़ी है, मेरी धरती सुरक्षित है।”